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नई शिक्षा नीति स्वाभिमान एवं गौरव को बढ़ायेगी-

भोपाल, 05 सितम्बर (वार्ता) मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने शिक्षक दिवस पर प्रदेश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएँ दीं।
श्री परमार ने कहा कि कोरोना संकटकाल जैसी चुनौती को भी प्रदेश के शिक्षकों ने अवसर में बदला है। इस दौरान प्रत्येक बच्चा बिना स्कूल जाये अपने घर में रहकर नियमित रूप से अध्ययन कर रहा है। प्रत्येक बच्चा ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ गया है। ऑनलाइन शिक्षा को अभियान के रूप में बच्चे-बच्चे तक पहुँचाने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने भारत के राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जन्म दिवस शिक्षकों के लिय आदर्श के रूप में है, जिसका सभी शिक्षकों को अनुसरण करना चाहिए। शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। इसलिये उसे समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट काल की चुनौती को शिक्षक ही अवसर में बदलने की ताकत रखते हैं, जिसे उन्होंने कर दिखाया। उन्होंने उत्कृष्ट विद्यालयों के प्राचार्यों से नई शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बेहतर कार्य करें और बच्चों में राष्ट्रभाषा एवं मातृभाषा तथा संस्कृति के लिये स्वाभिमान की भावना जाग्रत करें। उन्होंने उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्यों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा की और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संबंध में एक अभियान चलाकर व्यापक रूप से चर्चा करें। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के संबंध में समाज में विस्तृत चर्चा एवं प्रचार-प्रसार किया जाए। ताकि नई शिक्षा नीति के संबंध में लोगों को सही जानकारी मिले। साथ ही इसके बेहतर क्रियान्वयन में वे सहयोगी बनें।
उन्होंने जानकारी दी कि 5 से 25 सितम्बर तक सभी शिक्षक नई शिक्षा नीति पर अपने-अपने स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन विस्तृत चर्चा करेंगे तथा इसका वीडियो बनाकर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करेंगे। उन्होंने बताया कि 25 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक नई शिक्षा नीति पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह नई शिक्षा नीति पर जितना अधिक चिन्तन-मनन, विचार होगा उतना ही बेहतर तरीक से लागू करने में मदद मिलेगी।
प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के साथ बच्चों को वैश्विक स्तर पर चुनौतियों का सामना करने के लायक बनायेगी।
आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। ड्रापआउट बच्चों की संख्या को कम करना एवं शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच बनाना है। इसके तहत स्कूलों में 5+3+3+4 पाठ्यक्रम को लागू किया जायेगा। विषय विकल्पों की संख्या को बढ़ाया जायेगा, जिससे बच्चे अब आर्ट और साइंस के अलावा शारीरिक शिक्षा, कला, शिल्प और व्यावसायिक विषय भी चुन पायेंगे।
नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम एवं शिक्षण शास्त्र जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाईन थिकिंग, होलिस्टिक हेल्थ, आर्गेनिक लिविंग, वैश्विक नागरिकता शिक्षा जैसे समसामयिक विषयों की शुरूआत होगी, जिससे स्कूल बैग एवं पाठ्य-पुस्तकों का बोझ कम होगा। विद्यार्थियों को कम उम्र में सही नैतिक निर्णय के महत्व को सिखाया जायेगा। समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा की शुरूआत की जायेगी। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल पर ध्यान दिया जायेगा।
नाग
वार्ता
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