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राज्य » मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़


आदिवासी क्षेत्रों में निर्माण के कार्य समय पर हों-मीना

भोपाल, 05 सितम्बर (वार्ता) मध्यप्रदेश की आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिये है कि आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास के कार्य नियत समय में पूरे किये जायें।
सुश्री सिंह आज बेबिनार के माध्यम से उमरिया से भोपाल, नर्मदापुरम् और सागर संभाग के विभागीय अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थी। उन्होंने उन निर्माण एजेन्सियों के खिलाफ सख्त कार्रवाही किये जाने के लिये कहा, जो निर्माण कार्यों को पूरा करने में लापरवाही बरत रहे है। उन्होंने विभाग की बस्ती विकास योजना में सामुदायिक भवन एवं शालाओं में अतिरिक्त कक्षो के‍निर्माण कार्य प्राथमिकता से लिये जाने की बात कहीं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल्द ही विभाग के छात्रावास एवं आश्रम शालाओं का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। विभागीय अधिकारी अपने जिलों में सजगता के साथ इसकी तैयारी प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि विभाग के अनेक भवन कोविड-19 के लिये अधिग्रहित किये गये है। उन भवनों के उपयोग के पूर्व भवन और सामग्री को सेनेटाइज किया जाएं। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को दूरदर्शन और आकाशवाणी, ऑनलाइन और अन्य डिजिटल मॉड्यूल के माध्यम से कराई जा रही अध्ययन व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं आवासीय सहायता की राशि बैंक खातों में बगैर विलंब के ट्रान्सफर किये जाने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि वनवासी सही मायनो में जल, जंगल और पर्यावरण के संरक्षक होते है। राज्य सरकार ने वनाधिकार अधिनियम में पूर्व में निरस्त वन भूमि के पट्टों की पुन: समीक्षा किये जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी 15 सितम्बर तक पूर्व में काबिज वनवासियों को उनकी भूमि के पट्टे परीक्षण के बाद मान्य कराने में प्रभावी कार्यवाही करें। बैठक में बताया गया कि भोपाल संभाग में 9 हजार 200 निरस्त दावों में से 1592 दावों को परीक्षण के बाद मान्य किया गया है। नर्मदापुरम् संभाग में 8 हजार 300 दावों मे से 656 दावें मान्य किये गये है। सागर संभाग में 16 हजार 800 दावों में से 2380 दावें जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा मान्य किये गये है।
प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्रीमती पल्लवी गोविल ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पूर्व में निरस्त दावों का डिजिटाइजेशन का कार्य जल्द पूरा किया जाएं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दावें के लिये 50 रूपये की राशि स्वीकृत की गयी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निरस्त वन भूमि पट्टों में दो बुजुर्गों की गवाही को आधार मानकर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। प्रमुख सचिव ने पोस्ट मैट्रिक और आवासीय सहायता की पूर्व के लंबित प्रकरणों पर नाराजगी व्यक्त के। उन्होंने बताया कि पात्रता में सामाजिक एकीकरण और छात्रावासों की स्वीकृत सीटों पर शत् प्रतिशत प्रवेश हों। इसके लिये आदिवासी छात्रावासों में 70 प्रतिशत आदिवासी और अन्य 30 प्रतिशत सीटों पर अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, घुम्मकड़, अर्द्धघुम्मकड़ वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिये जाने की व्यवस्था की गयी है।
आयुक्त आदिम जाति कल्याण बी. चंद्रशेखर ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की 10 हजार चैम्पियन स्कूल में 3 हजार स्कूल आदिवासी क्षेत्रों के शामिल किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि विभाग के 860 हायर सेकण्डरी स्कूल में प्रति स्कूल में एक क्लास को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में कार्पोरेट रिस्पॉन्सिब्लिटी फण्ड (सी.एस.आर.) की मदद ली जा रही है।
नाग
वार्ता
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