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रोडवेज कर्मचारी लंबित वेतन मामला: हाईकोर्ट ने अधिकारियों के कारों की सूची मांगी

नैनीताल, 23 नवम्बर (वार्ता) उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों को चार महीने का लंबित वेतन नहीं मिलने के मामले में उच्च न्यायालय ने सोमवार को बेहद सख्त रूख अख्तियार करते हुए निगम के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह 24 घंटे के अदर बतायें कि निगम के अधिकारियों के पास कुल कितने सरकारी वाहन (कारेें) उपलब्ध हैं। न्यायालय ने इन वाहनों की नीलामी करने के संकेत दिये हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की युगलपीठ में उत्तराखंड परिवहन निगम कर्मचारी यूनियन और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता यूनियन की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य परिवहन निगम की ओर से कर्मचारियों को चार महीने का वेतन नहीं दिया गया है। इसके फलस्वरूप कर्मचारियों के सामने तमाम दिक्कतें आ रही हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि निगम प्रबंधन द्वारा परिवहन निगम कर्मचारी वेतनभोगी ऋण एवं बचत सहकारी समिति लिमिटेड के नाम पर कर्मचारियों के वेतन से काटे गये पांच करोड़ की धनराशि का भुगतान भी नहीं कर रहा है। जिससे कि समिति अपने कर्मचारियों को ऐसे दुरूह समय में ऋण या आर्थिक मदद उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ये राशि कर्मचारियों के वेतन से 2019 तक काटी गयी है।
इस मामले में अदालत ने निगम का पक्ष जानना चाहा लेकिन निगम की ओर से अदालत को वही रटा-रटाया जवाब पेश किया गया कि निगम के पास वेतन उपलब्ध कराने के लिये धन की कमी है। इसके बाद अदालत ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए निगम से पूछा है कि वह 24 घंटे के अंदर बताये कि निगम के प्रबंध निदेशक के अलावा अन्य अधिकारियों के पास कितने सरकारी वाहन उपलब्ध हैं। उनकी सूची कल तक अदालत को उपलब्ध करायें।
दूसरी ओर 79 करोड़ रुपये के मामले मेें सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार अनुपूरक बजट में व्यवस्था करने के बाद यह धनराशि निगम को उपलब्ध करायेगी। निगम की ओर से कोरोना महामारी के दौरान बसों का संचालन नहीं होने और शेष राशि पहाड़ों में बसे संचालन के नाम पर मांगी गयी थी।
रवीन्द्र, उप्रेती
वार्ता
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