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दुधमुंहे बच्चे के साथ जान जोखिम में डालकर दी क्लर्क की परीक्षा

दुधमुंहे बच्चे के साथ जान जोखिम में डालकर दी क्लर्क की परीक्षा

सिरसा, 23 सितंबर (वार्ता) हरियाणा में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की लिपिक परीक्षा में रोहतक के कलानौर से सिरसा से आईं साेनी देवी नौ महीने के दुधमुंहे बच्चे के साथ आई थीं।

यूनीवार्ता से बातचीत में सोनी देवी ने कहा, “पेपर क्या है भारी आफत है।“ परीक्षा केंद्र इतना दूर होने से उन्हें बच्चे के साथ आना बेहद मुश्किल लगा। उन्होंने कहा, “पेपर त दे दिया इब चुनाव आचार संहिता भी लग गई बैरा नी रिजल्ट भी आवैगा कै नही?“

सिरसा रेलवे स्टेशन पर गाड़ी इंतजार में बैठी सोना देवी ने बताया कि रेलगाड़ी में भीड़ के कारण सीट नहीं मिलती जिससे परीक्षा का दर्द और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर किसी परीक्षा का दूरस्थ परीक्षा केंद्र आया तो वह परीक्षा नहीं देने जाएंगी। ऐसी कहानी एक सोना देवी की नहीं बल्कि सैंकड़ों महिलाओं व युवतियों की है।

झज्जर से अपनीे बेटी पिंकी को परीक्षा के लिए लेकर आए महेंद्र सिंह ने बताया कि युवतियों को सफर में बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ा। टिकट के लिए मारामारी झेलनी पड़ी। फिर टिकट मिला तो सीट की आफत बन आई। सरकार को चाहिए था कि नजदीक के जिले में ही परीक्षा केंद्र देती। कमोबेश इसी तरह पटौदी की संजू, नारनौल की पूनम, धारूहेड़ा की मोनिका और महेंद्र गढ़ की काजल ने दर्द भरी दास्तान सुनाई। कुछ अभिभावकों ने तो यह भी कहा कि जब राज्य सरकार व आयोग को नजदीक चुनाव का पता था तो परीक्षा नहीं लेनी चाहिए थी। अगर सरकार बदल गई तो इस परीक्षा पर अभिभावकोंं का हुआ खर्च व्यर्थ ही जायेगा।

रेलवे स्टेशन पर गर्मी के कारण पीने के लिए ठंडे पानी व बैठने तक की अव्यवस्था रही। ट्रेन में दरवाजों से चढ़ने में दिक्कत हुई तो कई युवतियां व युवकों ने आपातकालीन खिड़कियों से चढ़कर सफर किया।

जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमति राजेश चौहान ने बताया कि सिरसा जिले में कुल अठारह हजार परीक्षार्थियों के लिए 75 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। कड़ी सुरक्षा व सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा हुई। परीक्षा देने करीब 52 फीसदी ही परीक्षार्थी पहुंचे। कम परीक्षार्थियों के पुहंचने के पीछे चुनाव आचार संहिता का लगना माना जा रहा है।

परीक्षा देने आए युवकों को भी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। सिरसा रेलवे स्टेशन पर टिकट लेने की कतार में खड़े रमेश, कश्मीर, राजेश सहित कई युवकों ने बताया कि वह जान जोखिम में डालकर रेलगाड़ी की छत पर बैठकर यहां तक आए थे और अब भीड़ से जाने के समय भी वही स्थिति फिर बन गई है। कल तो सिरसा रेलवे स्टेशन पर तेल लेकर पहुंची मालगाड़ी तक को इन युवकों ने रूकवा लिया और तेल की टंकियों पर चढ़कर यात्रा की जिद्द पर अड़ गए। आखिरकार रेलवे पुलिस व स्थानीय पुलिस की मदद से इन युवकों को उतार कर ट्रेन को रवाना करना पड़ा।

सं महेश विक्रम

वार्ता

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