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संस्कृत एवं संस्कृति का वाहक है शास्त्रार्थ : कुलपति

दरभंगा 05 सितम्बर (वार्ता) देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 सर्व नारायण झा ने शास्त्रार्थ को संस्कृत एवं संस्कृति का वाहक बताया और कहा कि विलुप्त हो चुकी शास्त्रार्थ परम्परा को पुनर्जीवित करना समाज एवं देश हित में जरूरी है।
श्री झा ने यहां शिक्षक दिवस समारोह के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि विलुप्त हो चुकी शास्त्रार्थ परम्परा को पुनर्जीवित करना समाज और देश हित में जरूरी है। इसे जारी रखने से संस्कृत एवं संस्कृति दोनों पुष्पित और पल्लवित होगी, कारण कि शास्त्रार्थ दोनों का सशक्त वाहक है। संस्कृत में छात्रों की कमी है लेकिन इन छात्रों को ही लेकर यदि नियमित रूप से एक-एक शिक्षक ईमानदारी से मेहनत करेंगे तो वही छात्र देश स्तर पर नाम करेगा। इससे विश्वविद्यालय की भी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और शिक्षकों का भी मान ऊंचा होगा।
वहीं, संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वत्रंत भारत में राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति के जन्मदाता डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। वस्तुत: उन्होंने ही आधुनिक शिक्षा की नींव रखी थी। डॉ. कृष्णन छात्र एवं शिक्षकों के बड़े हिमायती थे। उनकी भावनाओं एवं इच्छाओं के अनुरूप ही शिक्षकों को छात्रों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।
सं. सतीश सूरज
वार्ता
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