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एशियाई शेरों का घर कहे जाने वाले गुजरात में बाघ भी होने की हुई पुष्टि

लुनावाड़ा (गुजरात), 12 फरवरी (वार्ता) दुनिया भर में एशियाई शेरों की एकमात्र शरणस्थली माने जाने वाले गुजरात के मध्यवर्ती महिसागर जिले के जंगल में आज एक बाघ देखे जाने की वन विभाग ने पुष्टि की।
पांच दिन पहले एक स्थानीय शिक्षक ने अपने मोबाइल कैमरे से जिले के गढ़ इलाके में बाघ की तस्वीर खींची थी। इसको लेकर वन विभाग ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया था।
महिसागर के उप वन संरक्षक आर एम परमार ने आज यूएनआई को बताया कि बाघ के पंजे के निशान आज संतरामपुर के जंगल में देखे गये और उस क्षेत्र में लगाये गये नाइट विजन कैमरे में बाघ की तस्वीरें और वीडियो भी कैद हो गये हैं।
उन्होंने बताया कि 1992 में दक्षिण गुजरात के डांग क्षेत्र में बाघ देखे जाने के बाद पहली बार गुजरात के किसी हिस्से में बाघ दिखा है। यह राजस्थान और मध्य प्रदेश से यहां आया हो सकता है क्योंकि इन दोनो पड़ाेसी राज्यों के जंगलों में बाघ हैं।
ज्ञातव्य है कि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र जो इसके पश्चिमी भाग में है फैले गिर वन में 500 से अधिक एशियाई शेर रहते हैं।
रजनीश
वार्ता
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