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सुल्तानपुर में 14 लाख सीड बमों से प्राकृतिक रोपण, हरितक्रान्ति में होगी अहम भूमिका

सुलतानपुर, 14 अगस्त (वार्ता) उतर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में सरकार की हरितक्रान्ति मंशा को साकार करने एवं गोमती नदी के पुरातनकाल को पुनः वापस लाकर पर्यावरण को शुद्ध करने के उद्देश्य से प्रशासन नदी क्षेत्र के 110 तटीय गांवों में एक घण्टे के अन्तराल में 14 लाख सीड बमों से प्राकृतिक रोपण किया गया।
सुल्तानपुर जिले में मुख्य कार्यक्रम ब्लाक दूबेपुर के ओद्रा गांव में गोमती नदी के किनारे सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र सिंह, विधायक लम्भुआ देवमणि द्विवेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह, जिलाधिकारी सी0 इन्दुमती, पुलिस अधीक्षक हिमांशु कुमार सहित ग्राम प्रधानों, नेहरू युवा केन्द्र, स्वयं सेवियों, शैक्षिक संस्थाओं आदि ने भाग लेकर एक घण्टे के अन्तराल में 22 हजार सीड बमों द्वारा प्राकृतिक रोपण किया गया।
इसी प्रकार 137 किलोमीटर गोमती नदी क्षेत्र के 110 तटीय गांवों में भी एक घण्टे के अन्तराल में 12 से 13 हजार के मध्य प्रत्येक ग्राम में सीड बमों को छोड़ा गया। इस प्रकार जिले में प्रातः 10 बजे से 11 बजे के मध्य कुल 14 लाख सीड बमों के द्वारा प्राकृतिक रोपण किया गया। लिम्का बुक आफ रिकार्ड एवं एशिया बुक ऑफ रिकार्ड की टीमों द्वारा भी कार्यक्रम पर सतर्क नजर रखी गयी।
इस अवसर जिलाधिकारी सी इन्दुमती ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सकारात्मक सोंच के साथ कार्य करने वालों का प्रकृति भी साथ देती है। उन्होंने कहा कि इतने अधिक संख्या में सीड बम बनाना और उनका प्राकृतिक रोपण करना कोई आसान कार्य नहीं था, लेकिन जिले के जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वयं सेवियों, शैक्षित संस्थाओं, ग्रामवासियों आदि सभी के अथक प्रयास से यह सम्भव हो सका। उन्होंने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
सीड बम कार्यक्रम से सम्बन्धित आये विचार के विषय में जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि शासन की हरितक्रान्ति मंशा को साकार करने एवं गोमती नदी के पुरातनकाल को पुनः वापस लाकार पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ ही प्रकृति द्वारा उपलब्ध कराये गये बीजों का समुचित उपयोग करने के लिए यह पहल की गयी है। उन्होंने बताया कि अधिकतर बीज खराब हो जाते हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं हो पाता, को कृत्रिम रूप देते हुए सीड बम के रूप में गोमती तट के रिक्त स्थानों पर डाला गया।
श्रीमती इन्दुमती ने बताया कि जिले के तहत गोमती नदी के आ रहे 137 किमी0 के पूरे स्ट्रेच (110 गांव) को कवर करके जिला प्रशासन का उन दूरस्थ क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति एक रचनात्मक कार्य के जरिये दर्ज कराने का एक सार्थक प्रयास है, जिससे गोमती नदी को उसका पुराना सम्मान फिर से वापस दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि बीज का सम्मान करना हमारी भारतीय परम्परा रही है, यदि हम बीज का सम्मान नहीं करते हैं, तो हम अपनी संस्कृति से दूर जा रहें हैं।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य जीवन देने वाली शक्ति का सम्मान देने की बात को जन साधारण तक ले जाने का भी है। उन्होंने यह भी कहा कि मातृ शक्ति/बीज के विरूद्ध हो रहे अन्याय व उसका सम्मान करने की प्रेरणा के रूप में यह कार्यक्रम जाना जायेगा।
कार्यक्रम को विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुल्गी, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) हर्ष देव पाण्डेय, डीएफओ आनन्देश्वर प्रसाद ने भी सम्बोधित किया।
सं त्यागी
वार्ता
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