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राष्ट्रीय शाह इतिहास दो अंतिम वाराणसी

गृहमंत्री ने इतिहासकारों से अपील की कि वे देश के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने वाले अंग्रेजो और वामपंथियों को कोसना बंद करें और उस इतिहास को सत्य के आधार पर लिखें जिनके साथ अन्याय हुआ। इतिहास में विस्मृत किए गए ऐसे 200 महापुरुषों और 25 साम्राज्यों पर विस्तार से लिखें। आज देश स्वतंत्र है और इसलिये देश के गौरवशाली इतिहास का संशोधन करके संदर्भ ग्रंथ बनाकर इतिहास का पुन: लेखन किये जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की तब उनकी सोच चाहे जो भी रही हो, लेकिन स्थापना के इतने वर्षों बाद भी यह विश्वविद्यालय हिंदू संस्कृति को बनाए रखने के लिए अडिग खड़ा है और हिंदू संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर के योगदान की चर्चा करते हुये श्री शाह ने कहा कि वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति भी इतिहास न बनती, उसे भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से देखते। वीर सावरकर ने ही 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज देश फिर से एक बार अपनी गरिमा पुन: प्राप्त कर रहा है। पूरी दुनिया के अंदर भारत दुनिया के अंदर सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसकी स्वीकृति आज जगह-जगह पर दिखाई पड़ती है। पूरी दुनिया आज भारत के विचार को महत्व देती है।
कार्यक्रम की अध्‍यक्षता बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने की। दो दिवसीय संगोष्ठी में जापान से प्रो. ओइबा ताकाकी, प्रो. ईयामा मातो, मंगोलिया से डा. उल्जित लुबराजाव, थाइलैंड से डा. नरसिंह चरण पंडा, डा. सोम्‍बत, श्रीलंका से डा. वादिंगला पन्‍नलोका, वियतनाम से प्रो. दोथूहा, अमेरिका से डा. सर्वज्ञ के द्विवेदी, नेपाल से डा. काशीनाथ यमेत कई बुद्धिजीवी और इतिहासकार शामिल हुये।
इससे पहले लाल बहादुर शास्‍त्री अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर पहुंचने पर श्री शाह का स्वागत मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने किया। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय के अलावा कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रही।
प्रदीप
वार्ता
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