Tuesday, Dec 1 2020 | Time 14:14 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • सहकारी विभाग का एक कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार
  • बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका
  • जाट ने किया चलो किसानों दिल्ली चलो का आह्वान
  • नायडू ने दी बीएसएफ को शुभकामनायें
  • ट्रम्प के कोविड-19 विशेष सलाहकार का इस्तीफा
  • वार्नर के पहले टेस्ट से पहले फिट होने पर संदेहः लेंगर
  • वार्नर के पहले टेस्ट से पहले फिट होने पर संदेहः लेंगर
  • कश्मीर में डीडीसी चुनाव का दूसरा चरणः 11 बजे तक 15 64 प्रतिशत मतदान
  • उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ाने कल मुम्बई जायेंगे योगी
  • सेना के नायब सूबेदार ने आत्महत्या की
  • मुनेश गर्जर ने समस्याओं के शीघ्र निवारण के दिए निर्देश
  • क्लीन स्वीप से बचने उतरेगी विराट सेना
  • क्लीन स्वीप से बचने उतरेगी विराट सेना
राज्य » उत्तर प्रदेश


राजनीति कांग्रेस भाजपा दो अंतिम लखनऊ

हलफनामा में योगी सरकार ने कहा कि मृतका के शव का परिवार की रजामंदी से अंतिम संस्कार किया गया जबकि पूरे देश ने देखा कि कैसे उसके शव को केरोसीन डालकर जला दिया गया और परिवार वाले रोते रहे। हलफनामे में दूसरा झूठ कि दो-दो फोरेंसिंक जांच 22 सितम्बर के बाद हुईं। 22 सितम्बर के बाद हुई फोरेंसिक जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई। जबकि मृत्यु के पूर्व दिये गये बयान में खुद मृतका ने कहा कि उसके साथ रेप हुआ है और गैंगरेप हुआ है। यूपीए सरकार में 2013 में निर्भया काण्ड के बाद सीआरपीसी में बदलाव करते हुए रेप के प्रयास को भी रेप माना है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि आज तक जो भाजपा के प्रवक्ता और नेता सीना ठोंक रहे थे कि त्वरित कार्यवाही की गयी वह यह सच जान लें कि योगी सरकार ने जो एसआईटी का गठन किया था और 7 दिन में रिपोर्ट देने वाली थी उसका समय 10 दिन बढ़ा दिया गया है। सीबीआई जांच का अभी तक नोटीफिकेशन नहीं हुआ है। पूर्व में जिन मामलों में सीबीआई जांच की सिफारिश की गयी थी उनका आज तक नोटीफिकेशन नहीं हुआ है।

कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि योगी सरकार महिलाओं के प्रति अपराध को रोकने में और महिलाओं की रक्षा करने के प्रति कितनी उदासीन है कि पिछली छह अगस्त को समाप्त महिला आयोग के कार्यकाल को बढाने का फैसला आज तक नहीं लिया गया है। आज की तारीख में महिला आयोग का वैधानिक रूप से कोई अस्तित्व नहीं है। उनके पदाधिकारियों को कोई भी संवैधानिक अधिकार नहीं रह गया है।
प्रदीप
वार्ता
image