Tuesday, Feb 19 2019 | Time 17:17 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • न्यायिक जांच की रिपोर्ट का करा रहे परीक्षण : बच्चन
  • जोकोविच चौथी बार बने लॉरियस स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर
  • पूर्वोत्तर में चार रेशम परियोजनाओं का स्मृति ने किया उद्घाटन
  • पूर्वोत्तर में चार रेशम परियोजनाओं का स्मृति ने किया उद्घाटन
  • बजरंग दल की धमकी के बाद 20 कश्मीरी छात्रों ने सहारनपुर छोड़ा
  • स्थिति के अनुसार खेलना जानता हूं: पंत
  • स्थिति के अनुसार खेलना जानता हूं: पंत
  • शिवसेना ने किया नवजोत सिद्धू के खिलाफ प्रदर्शन
  • पाकिस्तान ने भारत से तनाव खत्म कराने के लिए सं रा से लगायी गुहार
  • लगातार नौंवे दिन शेयर बाजार में जारी रही बिकवाली
  • पाकिस्तान जैश पर संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई का विरोध नहीं करे: अमेरिका
  • स्पाइसजेट शुरू करेगी 12 नयी उड़ानें
मनोरंजन » कला एवं रंगमंच Share

अभिनेता बनना चाहते थे मुकेश

अभिनेता बनना चाहते थे मुकेश

..पुण्यतिथि 27 अगस्त के अवसर पर ..
मुंबई 26 अगस्त (वार्ता)भारतीय सिनेमा जगत में मुकेश ने भले ही अपने पार्श्व गायन से लगभग तीन दशक तक श्रोताओं को दीवाना बनाया लेकिन वह अपनी पहचान अभिनेता के तौर पर बनाना चाहते थे।

मुकेश चंद माथुर का जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में हुआ था।
उनके पिता लाला जोरावर चंद माथुर एक इंजीनियर थे और वह चाहते थे कि मुकेश उनके नक्शे कदम पर चलें लेकिन वह अपने जमाने के प्रसिद्ध गायक अभिनेता कुंदनलाल सहगल के प्रशंसक थे और उन्हीं की तरह गायक एवं अभिनेता बनने का ख्वाब देखा करते थे ।
मुकेश ने दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड दिया और दिल्ली लोक निर्माण विभाग में सहायक सर्वेयर की नौकरी कर ली जहां उन्होंने सात महीने तक काम किया।
इसी दौरान अपनी बहन की शादी में गीत गाते समय उनके दूर के रिश्तेदार मशहूर अभिनेता मोतीलाल ने उनकी आवाज सुनी और प्रभावित होकर वह उन्हें 1940 में मुंबई ले आए और अपने साथ रखकर पंडित जगन्नाथ प्रसाद से संगीत सिखाने का भी प्रबंध किया ।

इसी दौरान 1941 में मुकेश को एक हिन्दी फिल्म ..निर्दोष.. में अभिनेता बनने का मौका मिल गया जिसमें उन्होंने अभिनेता एवं गायक के रूप में संगीतकार अशोक घोष के निर्देशन मेंअपना पहला गीत..दिल ही बुझा हुआ हो तो..भी गाया।
यह फिल्म हालांकि टिकट खिड़की पर बुरी तरह से नकार दी गयी ।
इसके बाद मुकेश ने .दुख.सुख. और .आदाब अर्ज. जैसी कुछ और फिल्मों में भी काम किया लेकिन पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके।

इसके बाद मोतीलाल प्रसिद्ध संगीतकार अनिल विश्वास के पास मुकेश को लेकर गये और उनसे अनुरोध किया कि वह अपनी फिल्म में मुकेश से कोई गीत गवाएं ।
वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म पहली नजर में अनिल विश्वास के संगीत निर्देशन में.. दिल जलता है तो जलने दे..गीत के बाद मुकेश कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।
मुकेश ने इस गीत को सहगल की शैली में ही गाया था।
सहगल ने जब यह गीत सुना तो उन्होंने कहा था “अजीब बात है, मुझे याद नहीं आता कि मैंने कभी यह गीत गाया है।
” इसी गीत को सुनने के बाद सहगल ने मुकेश को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था ।

सहगल की गायकी के अंदाज से प्रभावित रहने के कारण शुरुआती दौर की अपनी फिल्मों में वह सहगल के अंदाज मे ही गीत गाया करते थे लेकिन वर्ष 1948 मे नौशाद के संगीत निर्देशन में फिल्म ..अंदाज.. के बाद मुकेश ने गायकी का अपना अलग अंदाज बनाया।
मुकेश के दिल में यह ख्वाहिश थी कि वह गायक के साथ साथ अभिनेता के रूप मे भी अपनी पहचान बनाये।
बतौर अभिनेता वर्ष 1953 मे प्रदर्शित माशूका,और वर्ष 1956 मे प्रदर्शित फिल्म अनुराग की विफलता के बाद उन्होने पुनः गाने की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया।

इसके बाद वर्ष 1958 मे प्रदर्शित फिल्म यहूदी के गाने ..ये मेरा दीवानापन है .. की कामयाबी के बाद मुकेश को एक बार फिर से बतौर गायक पहचान मिली।
इसके बाद मुकेश ने एक से बढ़कर एक गीत गाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
मुकेश ने अपने तीन दशक के सिने कैरियर में 200 से भी ज्यादा फिल्मों के लिये गीत गाये।
मुकेश को उनके गाये गीतों के लिये चार बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा वर्ष 1974 मे प्रदर्शित ..रजनी गंधा .. के गाने कई बार यूहीं देखा के लिये मुकेश नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किये गये।

राजकपूर की फिल्म ..सत्यम.शिवम.सुंदरम.. के गाने..चंचल निर्मल शीतल.. की रिकार्डिंग पूरी करने के बाद वह अमेरिका में एक कंसर्ट में भाग लेने गये जहां 27 अगस्त 1976 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
उनके अनन्य मित्र राजकपूर को जब उनकी मौत की खबर मिली तो उनके मुंह से बरबस निकल गया.. मुकेश के जाने से मेरी आवाज और आत्मा..दोनों चली गई।

दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह मुकेश के गाये गीतों मे जहां संवेदनशीलता दिखाई देती है वहीं निजी जिंदगी मे भी वह बेहद संवेदनशील इंसान थे और दूसरों के दुख.दर्द को अपना समझकर उसे दूर करने का प्रयास करते थे।
एक बार एक बीमार लड़की ने अपनी मां से कहा कि अगर मुकेश उन्हें कोई गाना गाकर सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है ।
मां ने जवाब दिया कि मुकेश बहुत बड़े गायक हैं, उनके पास आने के लिए कहां समय है और अगर वह आते भी हैं तो इसके लिए काफी पैसे लेंगे।
तब उसके डाक्टर ने मुकेश को उस लड़की की बीमारी के बारे में बताया।
मुकेश तुरंत लडकी से मिलने अस्पताल गए और उसे गाना गाकर सुनाया और इसके लिए उन्होंने कोई पैसा भी नहीं लिया।
लड़की को खुश देखकर मुकेश ने कहा, “यह लडकी जितनी खुश है, उससे ज्यादा खुशी मुझे मिली है।

वार्ता

बॉलीवुड

बॉलीवुड में कमबैक करेंगी पूनम ढिल्लों

मुंबई 19 फरवरी (वार्ता) जानी मानी अभिनेत्री पूनम ढिल्लों बॉलीवुड में कमबैक करने जा रही हैं।

अभिनेत्रियों

अभिनेत्रियों को खास पहचान दिलायी निम्मी ने

..जन्मदिन 18 फरवरी के अवसर पर ..
मुम्बई 17 फरवरी(वार्ता) बॉलीवुड में निम्मी को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने पचास और साठ के दशक में महज शोपीस के तौर पर अभिनेत्रियों को इस्तेमाल किये जाने जाने की विचार धारा को बदल दिया।

भारतीय

भारतीय सिनेमा जगत के जनक थे दादा साहब फाल्के

(पुण्यतिथि 16 फरवरी के अवसर पर)
मुबई 16 फरवरी (वार्ता) मुंबई में वर्ष 1910 में प्रदर्शित फिल्म ‘द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों की भीड़ में एक ऐसा शख्स भी था जिसे फिल्म देखने के बाद अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया।

सलमान

सलमान के साथ फिर काम करेंगी दिशा पटानी!

मुंबई 13 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पटानी एक बार फिर सलमान खान के साथ काम करती नजर आ सकती है।

सलमान

सलमान की फैमिली ने हमेशा सपोर्ट किया: कैटरीना

मुंबई 19 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड की बार्बी गर्ल कैटरीना कैफ को सलमान खान की फैमिली ने हमेशा सपोर्ट किया है।

अपनी

अपनी फिल्मों से खास पहचान बनायी साजिद ने

..जन्मदिन 18 फरवरी के अवसर पर ..
मुंबई 17 फरवरी (वार्ता)बॉलीवुड में साजिद नाडियाडवाला का नाम एक ऐसे फिल्मकार के रूप में लिया जाता है जिन्होंने अपनी निर्मित फिल्मों के जरिये दर्शकों के दिलो में खास पहचान बनायी है।

‘भारत’

‘भारत’ के लिये 10 करोड़ रुपये का सेट तैयार

मुंबई 14 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान की फिल्म ‘भारत’ के लिये 10 करोड़ का सेट तैयार
किया गया है।

तख्त

तख्त के लिये काफी उत्साहित हैं करण जौहर

मुंबई 19 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मकार करण जौहर अपनी आने वाली फिल्म तख्त के लिये
बेहद उत्साहित हैं।

बागी-3

बागी-3 में काम करेंगी श्रद्धा कपूर

मुंबई 13 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर बागी-3 में काम करती नजर आ सकती है।

नायक

नायक का सीक्वल बनाया जाना चाहिए: अनिल कपूर

मुंबई 19 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड के मिस्टर इंडिया अनिल कपूर का कहना है कि उनकी फिल्म नायक का सीक्वल बनाया जाना चाहिए।

पॉप गायिकी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी माइकल जैक्सन ने

पॉप गायिकी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी माइकल जैक्सन ने

..जन्मदिवस 29 अगस्त के अवसर पर ..
मुंबई 28 अगस्त(वार्ता)किंग ऑफ पॉप माइकल जैक्सन को ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने पॉप संगीत की दुनिया को पूरी तरह बदलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है।

माय वर्जिन डायरी डिजिटल प्लेटफार्म पर मचा रही धूम

माय वर्जिन डायरी डिजिटल प्लेटफार्म पर मचा रही धूम

नयी दिल्ली 25 मार्च (वार्ता) दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के छात्रों की जिंदगी पर आधारित फिल्म माय वर्जिन डायरी डिजिटल प्लेटफार्म जिओ सिनेमा, एयरटेल मूवीज, बिगफ्लिक्स, चिल्क्स, हंगामा मूवी, नेट्टीवुड आदि के जरिये वैश्विक स्तर पर धूम मचा रही है।

दिल्ली में भी होगा फिल्म उद्योग, डियोरामा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह आरंभ

दिल्ली में भी होगा फिल्म उद्योग, डियोरामा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह आरंभ

नयी दिल्ली 15 जनवरी (वार्ता) दिल्ली में भी फिल्म उद्योग स्थापित करने के मकसद से पहले डियोरामा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह एवं विपणन 2019 की कल रात यहां देश-विदेश के फिल्मी जगत के लोगों की मौजूदगी में शुरूआत हुयी।

भारतीय सिनेमा जगत के जनक थे दादा साहब फाल्के

भारतीय सिनेमा जगत के जनक थे दादा साहब फाल्के

(पुण्यतिथि 16 फरवरी के अवसर पर)
मुबई 16 फरवरी (वार्ता) मुंबई में वर्ष 1910 में प्रदर्शित फिल्म ‘द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों की भीड़ में एक ऐसा शख्स भी था जिसे फिल्म देखने के बाद अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया।

अभिनेत्रियों को खास पहचान दिलायी निम्मी ने

अभिनेत्रियों को खास पहचान दिलायी निम्मी ने

..जन्मदिन 18 फरवरी के अवसर पर ..
मुम्बई 17 फरवरी(वार्ता) बॉलीवुड में निम्मी को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने पचास और साठ के दशक में महज शोपीस के तौर पर अभिनेत्रियों को इस्तेमाल किये जाने जाने की विचार धारा को बदल दिया।

image