Tuesday, Jan 19 2021 | Time 23:51 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल दौरा बुधवार से
  • देश में 1 06 करोड़ के करीब पहुंची कोरोना संक्रमितों की संख्या
  • रिजिजू को आयुष मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
  • रुपेश सिंह हत्याकांड के दोषियों को अविलंब करें गिरफ्तार : नीतीश
  • नीतीश ने गुरू गोविंद सिंह की जयंती पर दी शुभकामनायें
  • ब्रिस्बेन मैच के हीरो ऋषभ उत्तराखंड के कोहिनूर : प्रेमचंद
  • रिजुजु को आयुष मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
  • तमिलनाडु में कोरोना सक्रिय मामले 5400 के करीब
  • कप्तान कोल ने ओडिशा को एक और हार से बचाया
  • कप्तान कोल ने ओडिशा को एक और हार से बचाया
  • चिर-प्रतिद्वंद्वी केरला और बेंगलुरु अपनी किस्मत बदलने उतरेंगे
  • चिर-प्रतिद्वंद्वी केरला और बेंगलुरु अपनी किस्मत बदलने उतरेंगे
  • कर्नाटक में कोरोना के सक्रिय मामलों में फिर से गिरावट
  • विराट, इशांत, हार्दिक की टेस्ट टीम में वापसी, नटराजन और शॉ बाहर
  • विराट, इशांत, हार्दिक की टेस्ट टीम में वापसी, नटराजन और शॉ बाहर
राज्य » अन्य राज्य


अल्मोड़ा का गोल्ज्यू मंदिर विवाद: हाईकोर्ट ने मामले को सिविल कोर्ट भेजा

नैनीताल, 19 नवम्बर (वार्ता) उत्तराखंड में अल्मोड़ा के प्रसिद्ध गोल्ज्यू मंदिर प्रबंधन विवाद में उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है और मामले के अंतिम निपटारे के लिये सिविल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है। तब तक मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन की अगुवाई में बनायी गयी कमेटी करेगी।
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता दीपक रूबाली की ओर से दायर जनहित याचिका पर इस वर्ष चार मार्च को महत्वपूर्ण आदेश जारी कर मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन की अगुवाई में गठित कमेटी के हाथों में दे दिया था। इसके बाद प्रशासन की ओर से इस मामले में एक कमेटी का गठन कर दिया गया था।
इसके बाद मंदिर का संस्थापक परिवार आगे आया और उसने चार मार्च के आदेश को पुनर्विचार याचिका के माध्यम से चुनौती दी। संध्या पंत की ओर से ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि जिलाधिकारी की अगुवाई में बनायी गयी प्रबंधन कमेटी मंदिर के धार्मिक कार्यों एवं अनुष्ठानों में हस्तक्षेप किया जा रहा है और इसे भंग किया जाये।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उनके परिवार की ओर से वर्ष 1919 में गोल्ज्यू मंदिर की स्थापना की गयी थी। तभी से उनका परिवार मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रबंधन करता आया है। कमेटी की ओर से मदिर में नये पुजारी की नियुक्ति की जारी रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया है कि कमेटी निष्पक्ष नहीं है और इसमें जनता का प्रतिधित्व नहीं है। कमेटी के सभी पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है। इस मामले में उनका पक्ष नहीं सुना गया इसके बाद अदालत ने पर्यटन सचिव एवं जिलाधिकारी अल्मोड़ा से जवाब मांगा था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने गुरुवार को मामले को सिविल कोर्ट स्थानांतरित करते हुए कहा कि सिविल अधिकारों के मामलों को जनहित याचिका के माध्यम से निर्णित नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही तब तक मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन की अगुवाई में बनायी गयी कमेटी के हाथ में ही रहेगा।
रवीन्द्र, उप्रेती
वार्ता
image