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पंजाब के अस्तित्व को बचाने के लिए 33 फीसदी क्षेत्र में पेड़ लगाने की आवश्यकता: सहोता

अमृतसर, 02 सितंबर (वार्ता) पंजाब में अमृतसर और तरनतारन के जिला वन अधिकारी सुरजीत सिंह सहोता ने बुधवार को कहा कि वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग के कारण 33 फीसदी जंगल की जरूरत है जबकि वर्तमान में पंजाब की स्थिति चिंताजनक है। वन और गैर-वन दोनों क्षेत्रों में केवल 6.5 प्रतिशत क्षेत्र में पौधे रोपे जाते हैं, इस प्रकार पंजाब में 26.5 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में रोपण की आवश्यकता है।
श्री सहोता आज यहां गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी कैंपस में 2500 विभिन्न किस्मों के पौधे रोपने के अभियान के शुभारंभ पर यहां आए थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से प्रेरणा लेनी चाहिए और पंजाब सरकार को राज्य में वनों को बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।
श्री सहोता ने कहा कि प्रोफेसर जसपाल सिंह संधू द्वारा विश्वविद्यालय को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने में व्यक्तिगत रुचि ली जा रही है। अन्य संस्थानों को भी इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रत्येक गांव में 400 पौधे लगाने का अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग के कारण 33 फीसदी जंगल की जरूरत है जबकि वर्तमान में पंजाब की स्थिति चिंताजनक है। वन और गैर-वन दोनों क्षेत्रों में 6.5 प्रतिशत क्षेत्र में पौधे रोपे जाते हैं, इस प्रकार पंजाब में 26.5 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में रोपण की आवश्यकता है। इस दिशा में पंजाब सरकार ने पहली ड्राइव के तहत 15 प्रतिशत क्षेत्र में पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
वन अधिकारी ने कहा कि किसानों को धान की फसल चक्र से निकालकर पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और साथ ही पर्यावरण की निर्मलता के साथ पानी की बचत हो। उन्होंने इस अवसर पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय को असंख्य पौधे प्रदान करने की पेशकश की और कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यकतानुसार वन विभाग से कई प्रकार के पौधे प्राप्त हो सकते हैं।
जीएनडीयू में टाहली, सागवान, सरींह, आम, जामन, नीम, सुखचैन, धरेक, पीपल, मसूढ़ा, तून, चक्करामिया, गुलमोहर, सतपतियां, अमलतास, जैकरंड़ा और चमेली, चाँदनी, हैबीकस, केशिया, जैटरोफा, कनेर अदि फूलदार पेड़ लगाए जा रहे हैं।
ठाकुर.श्रवण
वार्ता
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